कंजुष : उकडत असेल तर मी खिडक्या उघड्या ठेवतो, पण पंखा लावत नाही...
गंपू : तरीही उकडत असेल तर?
कंजुष : तर मात्र मी पंख्यासमोर बसतो...
कंजुष : मग पंखा सुरू करतो!!!
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आई : बाळा, तू हात धुतलेस, तर एक लाडू देईन... आणि पाय धुतलेस तर दोन लाडू देईन!!
गंपू : आई, तू डबाच खाली काढून ठेव, मी आंघोळ करून येतो!!!


