अनुपने भंगार मध्ये पडलेली बाबा आदमची सायकल बाहेर काढली. ती दुरूस्तीसाठी सायकल रिपारिंगवाल्याकडे नेली. तेव्हा त्यांच्या सायकलची अवस्था पाहून तो ‘साहेब, या सायकलची दुरूस्ती करणे अशक्य आहे’
अनुप: ‘पण नेपोलियन बोनापार्ट तर म्हणत होता. जगात काहीही अशक्य नाही’
तो: ‘मग त्याच्याकडेच घेऊन जा.
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असा कोणता गामा(पहेलवान) आहे, ज्याने आयुष्यांत कधी कुस्ती खेळली नाही?
वास्को -द- गामा!
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नोकर- ‘साहेब मला केराच्या टोपलीत शंभराच्या पाच नोटा सापडल्या, हे घ्या.’
मालक- ‘मीच फेकून दिल्या होत्या, नकली नोटा आहेत त्या’
नोकर - ‘म्हणूनच परत करीत आहे.
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शिक्षिका- मुलांनो! आपण नेहमी वडिलांच्या नावामागे श्री लावत जावे. रोहन; तुझ्या वडीलांचे नाव काय आहे?
रोहन- श्रीमतीराम!
शिक्षिका - गाढवा, वडिलांच्य नावामागे श्री. लावावे व आईच्या नावामागे श्रीमती. समजलं?
रोहन- पण बाई, माझ्या वडिलांचे नाव मतीराम आहे!
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